भारत की राष्ट्रपति ने विशाखापत्तनम में अंतर्राष्ट्रीय नौसेना बेड़े का कार्यक्रम देखा

भारत का मानना ​​है कि एक सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था समान विचारधारा वाले भागीदारों के सामूहिक उत्तरदायित्व और सहयोगी कार्रवाई पर आधारित है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 18.02.2026

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 18 फरवरी, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अंतर्राष्ट्रीय नौसेना बेड़े का कार्यक्रम देखा। वर्ष 2026 के इस अंतर्राष्ट्रीय नौसेना कार्यक्रम में 70 से अधिक देशों की नौसेनाएं भाग ले रही हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय नौसेना परेड कार्यक्रम समुद्री परंपराओं के लिए राष्ट्रों की एकता, विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। विभिन्न देशों के ध्वजों वाले जहाज और विभिन्न देशों के नाविक एकजुटता की भावना का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एकजुटता का यह भाव इस कार्यक्रम के विषय 'महासागरों के माध्यम से एकजुट' में साफ झलकता है। यह विश्व समाज के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि ऐसे सामूहिक नौसैनिक शक्ति की प्रतिबद्धता और संकल्प से सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समुद्री क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुंबकम' या 'पूरा विश्व एक परिवार है' के हमारे आदर्शों से प्रेरित है। यह सोच दर्शाती है कि वैश्विक सुरक्षा और विकास, स्थिरता और स्थायित्व साझेदारी के माध्यम से ही संभव हैं। आपसी साझेदारी का यह भाव एक स्थायी वैश्विक व्यवस्था की आधारशिला है। इसलिए भारत का मानना ​​है कि एक सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था समान विचारधारा वाले भागीदारों के सामूहिक उत्तरदायित्व और सहयोगी कार्रवाई पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह फ्लीट कार्यक्रम भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण को भी प्रोत्साहित करता है, 'महासागर' दृष्टिकोण का अर्थ है 'सभी क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति'।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और समान व्यापक समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए तत्पर है। क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना की यूनिट समुद्री क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले खतरों और चुनौतियों के विरुद्ध प्रतिरोध और रक्षा के विश्वसनीय साधन के रूप में कार्य करती हैं। भारत की नौसेना मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय अक्सर सबसे पहले सहायता प्रदान करती है तथा करुणा और दक्षता के साथ शीघ्रता से सहायता प्रदान करती है। भारत की नौसेना विश्व की नौसेनाओं के साथ सद्भाव बढ़ाने और विश्वास, भरोसे और मित्रता का माध्यम बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राष्ट्रपति ने मित्र विदेशी नौसेनाओं के अधिकारियों और नौसैनिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे अपनी सेवाओं और अपने राष्ट्रों की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका अनुशासन, समर्पण और दक्षता के आधार पर सामूहिक समुद्री सुरक्षा टिकी हुई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फ्लीट रिव्यू में उपस्थित होकर उन्होंने हमारे विश्वास को और मजबूत किया है और समुद्री क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस फ्लीट रिव्यू में आई सभी नौसेनाएँ सामूहिक रूप से महासागरों को वैश्विक समाज के विकास, उसकी समृद्धि और समग्र कल्याण के द्वार के रूप में विकसित करने में सहयोग करेंगी।

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